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General Hindi Notes

अव्यय और उसके भेद: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक अव्यय और निपात SSC के लिए

Rahul Kumar

SSC Exam Expert & Content Editor

Updated 19 Oct 2026

PDF Notes: अव्यय और उसके भेद: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक अव्यय और निपात SSC के लिए

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जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक और काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय (अविकारी शब्द) कहते हैं। अव्यय के चारों भेद और निपात SSC की हिंदी परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं। इस नोट्स में अव्यय की परिभाषा, उसके भेद, उपभेद, उदाहरण, ट्रिक और अभ्यास प्रश्न दिए गए हैं।

अव्यय की परिभाषा

अव्यय का अर्थ है ‘जो व्यय न हो’, अर्थात जिसके रूप में कभी परिवर्तन न हो। जैसे: आज, कल, और, परंतु, अरे, यहाँ, बहुत, से, तक। ऐसे शब्दों को अविकारी शब्द भी कहते हैं।

अव्यय के भेद

भेद काम उदाहरण
क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता बताता है धीरे, यहाँ, कल, बहुत, अवश्य
संबंधबोधक संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के दूसरे शब्दों से संबंध बताता है के पास, के बिना, के साथ, तक, के ऊपर, की ओर
समुच्चयबोधक दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ता है और, तथा, किंतु, परंतु, इसलिए, क्योंकि, अथवा
विस्मयादिबोधक हर्ष, शोक, आश्चर्य आदि भाव प्रकट करता है वाह!, अरे!, हाय!, छि!, शाबाश!
निपात वाक्य में अर्थ पर बल देता है ही, भी, तो, केवल, मात्र, तक

1. क्रियाविशेषण अव्यय

उपभेद अर्थ उदाहरण
कालवाचक समय बताने वाले आज, कल, अब, तब, सदा, कभी, अभी
स्थानवाचक स्थान बताने वाले यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, दूर, पास
परिमाणवाचक मात्रा बताने वाले बहुत, थोड़ा, कम, अधिक, ज़रा, काफ़ी
रीतिवाचक ढंग या तरीका बताने वाले धीरे, तेज़, अचानक, ऐसे, वैसे, जल्दी
निश्चयवाचक निश्चय बताने वाले अवश्य, बेशक, ज़रूर
निषेधवाचक इनकार बताने वाले न, नहीं, मत

क्रियाविशेषण की पहचान: क्रिया से ‘कब, कहाँ, कैसे, कितना’ पूछने पर जो उत्तर मिले, वही क्रियाविशेषण है। जैसे: “वह धीरे चलता है” (कैसे? – धीरे)।

2. संबंधबोधक अव्यय

प्रकार उदाहरण
कालवाचक पहले, बाद, आगे, पीछे
स्थानवाचक समीप, निकट, पास, बाहर
दिशावाचक की ओर, की तरफ़, की ओर
साधनवाचक के द्वारा, के कारण, के लिए
विरोधवाचक के विरुद्ध, के उलटे
समतावाचक के समान, की तरह, के बराबर
हेतुवाचक के कारण, की वजह से

संबंधबोधक सदैव संज्ञा या सर्वनाम के बाद आता है और कारक चिह्न (की, के) के साथ बनता है, जैसे: “घर के पास”, “मेज़ के ऊपर”।

3. समुच्चयबोधक अव्यय

उपभेद अर्थ उदाहरण
समानाधिकरण समान स्तर के शब्द या वाक्य जोड़ते हैं और, तथा, एवं, किंतु, परंतु, लेकिन, अथवा, या, इसलिए, अतः
व्यधिकरण एक मुख्य और एक आश्रित उपवाक्य जोड़ते हैं कि, क्योंकि, यदि, तो, जब, तब, ताकि, चूँकि, यद्यपि, तथापि
समानाधिकरण के भेद उदाहरण
संयोजक और, तथा, एवं
विभाजक (विकल्पबोधक) या, अथवा, चाहे, कि
विरोधदर्शक पर, परंतु, किंतु, लेकिन
परिणामदर्शक इसलिए, अतः, फलतः
व्यधिकरण के भेद उदाहरण
कारणवाचक क्योंकि, चूँकि, इसलिए कि
उद्देश्यवाचक ताकि, जिससे कि
संकेतवाचक यदि…तो, जो…तो, यद्यपि…तथापि
स्वरूपवाचक कि, यानी, अर्थात्

4. विस्मयादिबोधक अव्यय

भाव उदाहरण
हर्ष वाह!, अहा!, शाबाश!, धन्य!
शोक हाय!, आह!, अरे रे!, हे राम!
आश्चर्य अरे!, ओह!, क्या!
घृणा छि!, धिक्कार!, थू-थू!
स्वीकार हाँ!, अच्छा!, ठीक!
चेतावनी सावधान!, खबरदार!

5. निपात

वे शब्द जो किसी शब्द या वाक्य के बाद लगकर उसके अर्थ में बल या विशेषता लाते हैं: ही, भी, तो, तक, केवल, मात्र, भर, सा। जैसे: “वह ही आएगा” (केवल वह), “तुम भी चलो”।

उदाहरण और हल

उदाहरण 1. “वह कल आएगा” में ‘कल’ क्या है? → कालवाचक क्रियाविशेषण।

उदाहरण 2. “घर के पास पेड़ है” में ‘के पास’ क्या है? → स्थानवाचक संबंधबोधक।

उदाहरण 3. “वह नहीं आया क्योंकि बीमार था” में ‘क्योंकि’ क्या है? → व्यधिकरण समुच्चयबोधक (कारणवाचक)।

परीक्षा के लिए ट्रिक

  • क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता बताता है; संबंधबोधक संज्ञा या सर्वनाम के बाद आता है।
  • समुच्चयबोधक दो वाक्यों या शब्दों को जोड़ता है।
  • विस्मयादिबोधक के बाद प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है।
  • निपात के बिना भी वाक्य बनता है, पर अर्थ में बल नहीं आता।
  • यदि…तो जैसे जोड़े संकेतवाचक समुच्चयबोधक होते हैं।

Quick Tips

  • संबंधबोधक कारक चिह्न के साथ आता है।
  • क्रियाविशेषण के चार प्रश्न: कब, कहाँ, कैसे, कितना।
  • समुच्चयबोधक के दोनों उपभेद याद करें।
  • विस्मयादिबोधक के भाव के अनुसार उदाहरण याद रखें।

Quick Revision Points

  • अव्यय के रूप में कभी परिवर्तन नहीं होता।
  • अव्यय के चार भेद: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक।
  • निपात बल देने वाले शब्द हैं: ही, भी, तो।
  • क्योंकि, कि, यदि व्यधिकरण समुच्चयबोधक हैं।
  • और, तथा, किंतु, परंतु समानाधिकरण समुच्चयबोधक हैं।

Practice Questions With Answers

  1. “वाह!” कौन-सा अव्यय है?
    Answer: विस्मयादिबोधक
  2. “और” कौन-सा अव्यय है?
    Answer: समुच्चयबोधक (संयोजक)
  3. “यहाँ” कौन-सा अव्यय है?
    Answer: स्थानवाचक क्रियाविशेषण
  4. “के साथ” कौन-सा अव्यय है?
    Answer: संबंधबोधक
  5. “ही” और “भी” क्या हैं?
    Answer: निपात
  6. “क्योंकि” किस प्रकार का समुच्चयबोधक है?
    Answer: व्यधिकरण (कारणवाचक)
  7. “बहुत” किस प्रकार का क्रियाविशेषण है?
    Answer: परिमाणवाचक
  8. “हाय!” किस भाव का विस्मयादिबोधक है?
    Answer: शोक
  9. “अथवा” किस प्रकार का समुच्चयबोधक है?
    Answer: विभाजक (समानाधिकरण)
  10. अव्यय का दूसरा नाम क्या है?
    Answer: अविकारी शब्द

How to Practise This Chapter

Practise 10 questions every day and write the steps on paper. Then attempt timed sets from our practice papers and the previous year papers page. See all topics on the General Hindi notes page, read the previous topic क्रिया.

Frequently Asked Questions

अव्यय किसे कहते हैं?

जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक या काल से परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं।

अव्यय के कितने भेद हैं?

चार: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक; निपात को अलग माना जाता है।

क्रियाविशेषण किसे कहते हैं?

जो शब्द क्रिया की विशेषता बताए।

संबंधबोधक अव्यय क्या है?

जो संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से जोड़े।

समुच्चयबोधक अव्यय क्या है?

जो दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़े।

विस्मयादिबोधक अव्यय क्या है?

जो हर्ष, शोक, आश्चर्य आदि भाव प्रकट करे।

निपात क्या होते हैं?

जो शब्द वाक्य में अर्थ पर बल देते हैं, जैसे ही, भी, तो।

समानाधिकरण और व्यधिकरण में क्या अंतर है?

समानाधिकरण समान स्तर के वाक्य जोड़ता है और व्यधिकरण मुख्य तथा आश्रित वाक्य जोड़ता है।

कालवाचक क्रियाविशेषण के उदाहरण क्या हैं?

आज, कल, अब, तब, कभी।

स्थानवाचक क्रियाविशेषण के उदाहरण क्या हैं?

यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे।

क्या यह विषय SSC में पूछा जाता है?

हाँ, अव्यय के भेदों की पहचान SSC में पूछी जाती है।

क्या अव्यय में लिंग बदलता है?

नहीं, अव्यय का रूप कभी नहीं बदलता।

About the Author

Rahul Kumar

SSC Exam Expert & Content Editor

Rahul is a senior SSC exam strategist with 8+ years of experience helping aspirants crack CGL, CHSL and MTS exams. He writes in-depth notification breakdowns, exam pattern guides and preparation strategies.